Wednesday, May 13, 2009

बालगीते......चिउ चिउ ये.......अटक मटक चवळी चटक

चिउ चिउ ये
दाणा खा
पाणि पी
भुर्र्रर्रर्र उडून जा

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इथं इथं बैस रे मोरा
तान्हं बाळ घालतंय चारा...
चारा खा, पाणी पी
भुरर्कन उडून जा...

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अटक मटक चवळी चटक
चवळी झाली गोड गोड
जिभेला आला फोड फोड
फोड काही फुटेना
घरचा पाहूणा उठेना

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सर सर उंच वाढलं झाड वाढलं झाड
बघता बघता गेलं ढगा आड ढगा आड
ढगांच झालं पाणीच पाणी पाणीच पाणी
झाडाला सुचली गोड गाणी गोड गाणी
गाण्यांची झाली फळं फुलं फळं फुलं
वेचायली आली मुली मुलं मुली मुल




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